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सामाजिक न्याय मंत्री, ब्रह्मा कुमारी आध्यात्मिक संस्था के साथ मिलकर दिल्ली एनसीआर के लिए नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एक वाहन का शुभारंभ करेंगे

प्रविष्टि तिथि: 14 FEB 2024 

नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों को चलाने और नशा मुक्ति के संदेश का प्रसार करने के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक संगठन सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे है। आज 14 फरवरी, 2024 को शाम 4:00 बजे नशा मुक्त भारत अभियान को समर्पित एक वाहन लॉन्च किया जाएगा। डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री उपस्थिति रहेंगे। इस वाहन का उपयोग दिल्ली-एनसीआर में नशा मुक्ति से संबद्ध जागरूकता गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (एसजेई) ने “नशा मुक्त भारत अभियान” (एनएमबीए) के  संदेश के विस्तार के लिए 4 मार्च, 2023 को ब्रह्मा कुमारिस, माउंट आबू के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।” ब्रह्माकुमारीज ने युवाओं और महिलाओं सहित जनसामान्य के  बीच इस विषय पर जागरूकता के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

मादक द्रव्यों का सेवन एक ऐसा मुद्दा है, जो देश के सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। किसी भी पदार्थ पर निर्भरता न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज को भी बाधित करती है। नशीले पदार्थों के नियमित सेवन से व्यक्ति इन पर निर्भर होने लागता है। इनमें मौजूद यौगिकों से न्यूरो-मनोरोग संबंधी विकार, हृदय संबंधी रोग, साथ ही दुर्घटनाएं, आत्महत्याएं और हिंसा को बढ़ावा मिलता है। इसलिए, मादक द्रव्यों के सेवन और निर्भरता को एक मनो-सामाजिक-चिकित्सीय समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए।

राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी), एम्स, नई दिल्ली के माध्यम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने भारत में मादक द्रव्यों के उपयोग की सीमा और रूपरेखा पर पहली व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, शराब भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाने वाला सबसे आम मनो-सक्रिय पदार्थ है। इसके पश्चात कैनबिस और ओपियोइड्स हैं।

मादक द्रव्यों की मांग के खतरे को रोकने के लिए, सरकार का सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई), नशीले पदार्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) लागू कर रहा है। यह एक व्यापक योजना है जिसके तहत राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके लिए शिक्षा और जागरूकता सृजन, क्षमता निर्माण, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पूर्व-नशे के आदी लोगों की आजीविका सहायता के लिए केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासन, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सरकारी अस्पतालों में नशीले पदार्थों की मांग में कमी के लिए कार्यक्रम और संचालन और रखरखाव के लिए गैर सरकारी संगठन/वीओ नशेड़ियों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र (एलआरसीए) बनाए गए है। किशोरों के बीच नशीले पदार्थों के प्रारंभिक उपयोग की रोकथाम के लिए समुदाय आधारित सहकर्मी नेतृत्व हस्तक्षेप (सीपीएलआई), पहचाने गए जिलों में आउटरीच और ड्रॉप इन सेंटर (ओडीआईसी) और जिला नशा मुक्ति केंद्र (डीडीएसी) और लत उपचार सुविधाएं (एटीएफ) भी सरकारी अस्पतालों में’ मुहैया कराई गई है।

सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय ने युवाओं के बीच मादक द्रव्यों के सेवन के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता सृजन के लिए वर्तमान में देश भर में महत्वाकांक्षी नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) शुरू किया है। इसमें उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसरों, स्कूलों और कार्यक्रम की पहुंच और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नशा मुक्त भारत अभियान की उपलब्धियां:

  1. अब तक जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 10.74 करोड़ से अधिक लोग इस अभियान की जानकारी प्राप्त कर चुके हैं।
  2. चिन्हित जिलों में अभियान गतिविधियों का नेतृत्व करने के लिए 8,000 प्रमुख स्वयंसेवकों का चयन किया गया और उन्हें प्रशिक्षित किया गया है।
  3. 3.38 करोड़ से अधिक युवाओं ने अभियान की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया है और नशीले पदार्थों के उपयोग के खिलाफ संदेश का प्रसार किया है। लगभग 4,000 से अधिक युवा मंडल, नेहरू युवा केंद्र संगठन और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवक और युवा क्लब भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं।
  4. आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं, सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम), महिला मंडलों और महिला स्वयं-सहायता समूह के माध्यम से इस अभियान को विस्तार देने में 2.27 करोड़ से अधिक महिलाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है।
  5. फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर हैंडल बनाकर और उन पर दैनिक अपडेट साझा करके अभियान के संदेश को ऑनलाइन फैलाने के लिए प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया है।
  6. जिलों और प्रमुख स्वयंसेवकों द्वारा वास्तविक समय के आधार पर गतिविधियों के डेटा को कैप्चर करने के लिए एक एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर रखा गया है।
  7. जनता की आसानी से पहुंच के लिए सभी नशामुक्ति सुविधाओं को जियो-टैग किया गया है।

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