उपराष्ट्रपति ने कहा – भारत अब सुसुप्त अवस्था में नहीं है,
शांति को ताकतवर स्थिति से ही सुरक्षित रखा जा सकता है; हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना ही शांति का सबसे सुरक्षित मार्ग है – उपराष्ट्रपति
विश्व के किसी भी भाग में हो रहा संघर्ष परस्पर लड़ रहे देशों के अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है – उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक सहभागिता कार्यक्रम (इन-स्टेप) के प्रतिभागियों को संबोधित किया
उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज इस बात पर जोर दिया कि अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी में भारत का उत्थान विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा आश्वासन है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा वैश्विक शांति, स्थिरता और सद्भाव का पोषण करने और उसे बनाए रखने के कार्य में समान विचारधारा वाले देशों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह देखते हुए कि विश्व के किसी भी भाग में हो रहा संघर्ष परस्पर लड़ रहे देशों के अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी प्रभावित करता है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे टकराव का समाधान कूटनीति और बातचीत में निहित है। इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि अलगाव का दृष्टिकोण अब अतीत की बात है उपराष्ट्रपति ने इस अशांत समय में राष्ट्रों को सार्थक चर्चा में शामिल होने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर श्री रजित पुन्हानी, सचिव, राज्यसभा, लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया, कमांडेंट, एनडीसी और इन-स्टेप कार्यक्रम के प्रतिभागी उपस्थित थे।




