“रहस्य वाली हर चीज़ में अंधकार और प्रकाश का मिश्रण होना चाहिए। जब भी मैं कुछ लाइटिंग करता हूं, तो मैं सुनिश्चित करता हूं कि यह मिश्रण मौजूद हो”: संतोष सिवन

संतोष सिवन ने एक दृश्य के भीतर रहस्य पैदा करने में अंधकार और प्रकाश के संतुलन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “रहस्य वाली हर चीज़ में अंधकार और प्रकाश का मिश्रण होना चाहिए। जब भी मैं कोई लाइटिंग करता हूं, तो मैं सुनिश्चित करता हूं कि यह मिश्रण मौजूद हो। अगर आप पियानो बजा रहे हैं, तो आपको सभी कुंजियों के साथ बजाना चाहिए।” यह दर्शन उनकी विशिष्ट दृश्य शैली का आधार है, जिसने विश्व स्तर पर दर्शकों को आकर्षित किया है।
संतोष सिवन ने अपने विविध अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न फिल्म शैलियों के लिए विशिष्ट निरूपण की जरूरत होती है और उन्हें आर्ट हाउस से लेकर व्यावसायिक फिल्मों तक विभिन्न शैलियों में काम करने में आनंद आता है। हॉलीवुड में अपने काम को लेकर सिवन ने कहा कि उद्योग में समय-सारिणी का कड़ाई से अनुपालन किया जाता है। उन्होंने आगे कहा, “मैंने जिन परियोजनाओं में काम किया है, उनसे मैंने कुछ न कुछ सीखा है।”

इस सत्र के दौरान सिवन ने प्रतिष्ठित भारतीय निर्देशकों के साथ अपने सहयोग से जुड़ी कहानियों को साझा किया। उन्होंने मणिरत्नम के साथ अपने दीर्घकालिक सहयोग को रेखांकित किया, जिसके तहत उन्होंने छह फिल्मों में साथ काम किया है। सिवन ने फिल्म ‘दिल से’ में प्रीति जिंटा के किरदार को एक मलयाली लड़की बनाने के लिए मणिरत्नम को तैयार करने और ‘छैया छैया’ गाने की यादगार फिल्मांकन के बारे में बताया, जिसमें शाहरुख खान ने चलती हुई ट्रेन में बिना सुरक्षा कवच (हार्नेस) के परफॉर्म किया था। इस पूरे फिल्मांकन को एक मनोरम रेल यात्रा मार्ग के बीच ढाई दिन में पूरा किया गया था।
सिवन ने विभिन्न निर्देशकों की अनूठी कार्यशैली की प्रशंसा की। इनमें प्रियदर्शन की संपादन में सटीकता, राज कुमार संतोषी का सेट पर व्यापक नियंत्रण और शाजी एन. करुण का दृश्य अभिविन्यास शामिल है। फिलहाल वे राजकुमार संतोषी के साथ सनी देओल और प्रीति जिंटा अभिनीत फिल्म ‘लाहौर- 1947’ पर काम कर रहे हैं।

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