Saturday, May 16, 2026

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देश में ही विकसित डिटेक्टर्स IB द्वारा 12 सुरक्षा एजेंसियों को सौंपे जाएंगे ताकि उन्हें फील्ड में तैनात किया जा सके

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत सरकार सुरक्षा बलों की क्षमता निर्माण और उन्हें मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है


सुरक्षा बलों को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, परमाणु ऊर्जा विभाग और DRDO ने दो प्रकार के एक्सप्लोसिव डिटेक्टर्स देश में ही विकसित करने में सफलता हासिल की

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने IB के निदेशक को एक्सप्लोसिव डिटेक्टर्स सौंपे


डिटेक्टर्स का सफल उत्पादन ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बेहतरीन उदाहरण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत सरकार सुरक्षा बलों की क्षमता निर्माण और उन्हें मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। सुरक्षा बलों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (ECIL), परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय सुरक्षा बलों के लिए दो अलग-अलग प्रकार के एक्सप्लोसिव डिटेक्टर्स देश में ही विकसित करने में सफलता हासिल की है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने हाल ही में आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक को एक्सप्लोसिव डिटेक्टर्स सौंपे ताकि उन्हें सुरक्षा बलों में तैनात किया जा सके। इस अवसर पर भारतीय थलसेना, SPG, NSG, CISF, ITBP, SSB, BCAS, और SFF जैसी विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह डिटेक्टर्स आईबी द्वारा 12 सुरक्षा एजेंसियों को सौंपे जाएंगे ताकि उन्हें फील्ड में तैनात किया जा सके। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने डिटेक्टर्स के सफल उत्पादन को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बेहतरीन उदाहरण करार दिया।

इन डिटेक्टर्स में एक आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (lMS) तकनीक और दूसरा रमण बैक स्कैटरिंग (RBS) सिद्धांत पर आधारित है। इन्हें सुरक्षा एजेंसियों की खास जरूरतों का ध्यान रखकर तैयार किया गया है। वर्ष 2017 में आईबी के सुझाव पर शुरू किए गए डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इन डिटेक्टर्स को विकसित किया गया है। इन डिटेक्टर्स का इस्तेमाल करने जा रही एजेंसियों से कहा गया है कि वे फील्ड में तैनाती के दौरान दोनों डिटेक्टर्स के बारे में अपनी फीडबैक मुहैया कराएं ताकि जरूरत होने पर भविष्य में बनाए जाने वाले डिटेक्टर्स में और सुधार किए जा सकें।

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