Wednesday, June 19, 2024
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जीएसआई ने मैंगलोर में “अपतटीय अन्वेषण: तालमेल और अवसर (ओईएसओ)” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया प्रविष्टि तिथि: 15 FEB 2024 5:58PM by PIB Delhi भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के समुद्री एवं तटीय सर्वेक्षण प्रभाग (एमसीएसडी) ने आज मैंगलोर में “अपतटीय अन्वेषण: तालमेल और अवसर (ओईएसओ)” विषय पर कार्यशाला का सफल आयोजन किया। यह कार्यशाला भारत में अपतटीय अन्वेषण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य की दिशा में एक अहम सहयोगपूर्ण प्रयास था। इस कार्यशाला का उद्घाटन श्री वी. एल. कांता राव, सचिव, खान मंत्रालय, भारत सरकार ने किया। श्री राव ने अपतटीय क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान साझा करने के बारे में चर्चा करने के लिए सरकारी निकायों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और प्रमुख उद्योगों सहित हितधारकों के वैविध्‍यपूर्ण समूह को एक साथ लाने के लिए जीएसआई को बधाई दी। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री. वी.एल. कांता राव ने कहा कि जीएसआई नीलामी के लिए 35 अपतटीय खनिज ब्लॉक पहले ही भारत सरकार को सौंप चुका है। इसके अलावा जीएसआई द्वारा 24 अन्‍य ब्लॉक नीलामी के लिए सौंपे जाने की योजना है। अन्वेषण और दोहन के लिए अपतटीय ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया एक नया क्षेत्र होने के नाते, इस पहल को सार्थक तरीके से सफल बनाने के लिए खान मंत्रालय अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 में संशोधनों पर काम कर रहा है। श्री कांता राव ने इस बात को रेखांकित किया कि 2023 के संशोधनों के साथ, खान मंत्रालय इन अपतटीय ब्लॉकों के लिए अगले 2-3 महीनों में नीलामी की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके अलावा, खान मंत्रालय प्रक्रियाओं, मानदंडों और एसओपी विकसित करने की भी प्रक्रिया में है, जो निजी क्षेत्र के बोलीकर्ता को नीलामी में ब्लॉक मिल जाने के बाद दोहन के कार्य को आगे बढ़ाने से संबंधित उसकी आवश्यकताओं का ध्यान रखेंगे। श्री राव ने अपनी बात समाप्‍त करते हुए जीएसआई की 172 वर्षों से अधिक की यात्रा के दौरान सृजित विशाल भूवैज्ञानिक/अपतटीय डेटा के बारे में चर्चा की। उन्होंने सभी से जीएसआई पोर्टल और हाल ही में लॉन्च किए गए एनजीडीआर पोर्टल के माध्यम से जीएसआई डेटा देखने का आग्रह किया, जो कि अपतटीय क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों के लिए बहुत मददगार है। उन्होंने स्वयं का डेटा संग्रहीत रखने वाले अन्य संस्थानों से भी अपना डेटा सार्वजनिक करने का अनुरोध किया, ताकि अन्य एजेंसियां उसे अपने उपयोग में ला सकें। श्री राव ने देश के लाभ की खातिर जीएसआई, शिक्षा जगत, वैज्ञानिक संस्थानों, पीएसयू और अपतटीय क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों से इन खनिज ब्लॉकों के अन्‍वेषण और दोहन में जुटे उद्योगों के साथ सहयोग करने और उनकी सहायता करने का आग्रह किया। जीएसआई के महानिदेशक श्री जनार्दन प्रसाद ने अपने संबोधन में इस कार्यशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत सरकार के वृहद दृष्टिकोण के अनुरूप राष्ट्र त्‍वरित आर्थिक विकास के लिए अपतटीय खनिज संसाधनों के दोहन की यात्रा पर निकल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) 1970 के दशक से अपतटीय अन्वेषण के क्षेत्र में काम कर रहा है और इसने भारत के तटीय क्षेत्रों की अपार क्षमता पर जोर देते हुए, पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स, हैवी मैटल प्लेसर, लाइम मड और निर्माण रेत के लिए विभिन्न अपतटीय ब्लॉकों को चिह्नित किया है। उन्होंने कहा कि संसाधनों का खजाना होने के बावजूद, इस क्षमता का अधिकांश भाग अप्रयुक्त है। उन्होंने कहा कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि इस क्षमता का टिकाऊ और जिम्मेदार तरीके से दोहन किया जाए, ताकि इन संपदाओं से आने वाली पीढ़ियों का लाभान्वित होना सुनिश्चित किया जा सके। तकनीकी सत्रों के दौरान चर्चा अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 में संशोधन और अपतटीय अन्वेषण के लिए निजी अन्वेषण एजेंसियों की अधिसूचना के लिए मसौदा दिशानिर्देश तैयार करने के इर्द-गिर्द केंद्रित रही। इन चर्चाओं का उद्देश्य अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है। इस कार्यशाला की कार्यसूची में विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल रही, जिनमें अपतटीय क्षेत्र में जीएसआई की गतिविधियों का अवलोकन, अन्वेषण और दोहन को बढ़ावा देने में सरकारी पहल, डेटा साझा करने के लिए सहयोगपूर्ण ढांचे और अपतटीय खनिज अन्वेषण के लिए टिकाऊ पद्धतियां शामिल थीं। कार्यशाला में अपतटीय अन्वेषण में शामिल एजेंसियों के बीच प्रभावी डेटा साझाकरण और सहयोग के लिए तंत्र स्थापित करने, संयुक्त अनुसंधान पहल, सूचना साझा करने और अपतटीय खनिज संसाधनों में नवाचार एवं अन्वेषण के लिए तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान हेतु अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया। इस कार्यशाला में पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय, एनआईओ, एनसीपीओआर, ओएनजीसी, एनआईओटी, आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड और डीजीएच के प्रमुख विशेषज्ञों ने डेटा अधिग्रहण से लेकर पर्यावरणीय सरोकारों तक के विषयों पर प्रस्तुतियां पेश कर प्रतिभागियों को अपतटीय अन्वेषण से संबंधित चुनौतियों और अवसरों के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी प्रदान कीं। इस कार्यशाला ने मंत्रालयों, रक्षा, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षा जगत और उद्योग जगत के प्रतिभागियों के साथ सार्थक चर्चा के एक मंच के रूप में कार्य किया।

जीएसआई ने मैंगलोर में “अपतटीय अन्वेषण: तालमेल और अवसर (ओईएसओ)” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 15 FEB 2024 5:58PM by PIB Delhi

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के समुद्री एवं तटीय सर्वेक्षण प्रभाग (एमसीएसडी) ने आज मैंगलोर में “अपतटीय अन्वेषण: तालमेल और अवसर (ओईएसओ)” विषय पर कार्यशाला का सफल आयोजन किया। यह कार्यशाला भारत में अपतटीय अन्वेषण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य की दिशा में एक अहम सहयोगपूर्ण प्रयास था।

इस कार्यशाला का उद्घाटन श्री वी. एल. कांता राव, सचिव, खान मंत्रालय, भारत सरकार ने किया। श्री राव ने अपतटीय क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान साझा करने के बारे में चर्चा करने के लिए सरकारी निकायों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और प्रमुख उद्योगों सहित हितधारकों के वैविध्‍यपूर्ण समूह को एक साथ लाने के लिए जीएसआई को बधाई दी।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री. वी.एल. कांता राव ने कहा कि जीएसआई नीलामी के लिए 35 अपतटीय खनिज ब्लॉक पहले ही भारत सरकार को सौंप चुका है। इसके अलावा जीएसआई द्वारा 24 अन्‍य ब्लॉक नीलामी के लिए सौंपे जाने की योजना है। अन्वेषण और दोहन के लिए अपतटीय ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया एक नया क्षेत्र होने के नाते, इस पहल को सार्थक तरीके से सफल बनाने के लिए खान मंत्रालय अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 में संशोधनों पर काम कर रहा है।

श्री कांता राव ने इस बात को रेखांकित किया कि 2023 के संशोधनों के साथ, खान मंत्रालय इन अपतटीय ब्लॉकों के लिए अगले 2-3 महीनों में नीलामी की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके अलावा, खान मंत्रालय प्रक्रियाओं, मानदंडों और एसओपी विकसित करने की भी प्रक्रिया में है, जो निजी क्षेत्र के बोलीकर्ता को नीलामी में ब्लॉक मिल जाने के बाद दोहन के कार्य को आगे बढ़ाने से संबंधित उसकी आवश्यकताओं का ध्यान रखेंगे।

श्री राव ने अपनी बात समाप्‍त करते हुए जीएसआई की 172 वर्षों से अधिक की यात्रा के दौरान सृजित विशाल भूवैज्ञानिक/अपतटीय डेटा के बारे में चर्चा की। उन्होंने सभी से जीएसआई पोर्टल और हाल ही में लॉन्च किए गए एनजीडीआर पोर्टल के माध्यम से जीएसआई डेटा देखने का आग्रह किया, जो कि अपतटीय क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों के लिए बहुत मददगार है। उन्होंने स्वयं का डेटा संग्रहीत रखने वाले अन्य संस्थानों से भी अपना डेटा सार्वजनिक करने का अनुरोध किया, ताकि अन्य एजेंसियां उसे अपने उपयोग में ला सकें। श्री राव ने देश के लाभ की खातिर जीएसआई, शिक्षा जगत, वैज्ञानिक संस्थानों, पीएसयू और अपतटीय क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों से इन खनिज ब्लॉकों के अन्‍वेषण और दोहन में जुटे उद्योगों के साथ सहयोग करने और उनकी सहायता करने का आग्रह किया।

जीएसआई के महानिदेशक श्री जनार्दन प्रसाद ने अपने संबोधन में इस कार्यशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत सरकार के वृहद दृष्टिकोण के अनुरूप राष्ट्र त्‍वरित आर्थिक विकास के लिए अपतटीय खनिज संसाधनों के दोहन की यात्रा पर निकल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) 1970 के दशक से अपतटीय अन्वेषण के क्षेत्र में काम कर रहा है और इसने भारत के तटीय क्षेत्रों की अपार क्षमता पर जोर देते हुए, पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स, हैवी मैटल प्लेसर, लाइम मड और निर्माण रेत के लिए विभिन्न अपतटीय ब्लॉकों को चिह्नित किया है। उन्होंने कहा कि संसाधनों का खजाना होने के बावजूद, इस क्षमता का अधिकांश भाग अप्रयुक्त है। उन्होंने कहा कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि इस क्षमता का टिकाऊ और जिम्मेदार तरीके से दोहन किया जाए, ताकि इन संपदाओं से आने वाली पीढ़ियों का लाभान्वित होना सुनिश्चित किया जा सके।

तकनीकी सत्रों के दौरान चर्चा अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 में संशोधन और अपतटीय अन्वेषण के लिए निजी अन्वेषण एजेंसियों की अधिसूचना के लिए मसौदा दिशानिर्देश तैयार करने के इर्द-गिर्द केंद्रित रही। इन चर्चाओं का उद्देश्य अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है।

इस कार्यशाला की कार्यसूची में विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल रही, जिनमें अपतटीय क्षेत्र में जीएसआई की गतिविधियों का अवलोकन, अन्वेषण और दोहन को बढ़ावा देने में सरकारी पहल, डेटा साझा करने के लिए सहयोगपूर्ण ढांचे और अपतटीय खनिज अन्वेषण के लिए टिकाऊ पद्धतियां शामिल थीं। कार्यशाला में अपतटीय अन्वेषण में शामिल एजेंसियों के बीच प्रभावी डेटा साझाकरण और सहयोग के लिए तंत्र स्थापित करने, संयुक्त अनुसंधान पहल, सूचना साझा करने और अपतटीय खनिज संसाधनों में नवाचार एवं अन्वेषण के लिए तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान हेतु अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया।

इस कार्यशाला में पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय, एनआईओ, एनसीपीओआर, ओएनजीसी, एनआईओटी, आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड और डीजीएच के प्रमुख विशेषज्ञों ने डेटा अधिग्रहण से लेकर पर्यावरणीय सरोकारों तक के विषयों पर प्रस्तुतियां पेश कर प्रतिभागियों को अपतटीय अन्वेषण से संबंधित चुनौतियों और अवसरों के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी प्रदान कीं। इस कार्यशाला ने मंत्रालयों, रक्षा, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षा जगत और उद्योग जगत के प्रतिभागियों के साथ सार्थक चर्चा के एक मंच के रूप में कार्य किया।

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